पीएचडी कार्यक्रम
पीएचडी कार्यक्रम
अवधि : पीएचडी कार्यक्रम (पूर्णकालिक/अंशकालिक) की न्यूनतम अवधि कोर्सवर्क सहित तीन (3) वर्ष तथा पीएचडी कार्यक्रम में प्रवेश की तिथि से अधिकतम अवधि छह (6) वर्ष होगी।
पाठ्यक्रम निदेशक : डॉ. रचना शर्मा
कुल सीटें : 22 (18 पूर्णकालिक एवं 4 अंशकालिक)
आईआईएमसी का पीएचडी कार्यक्रम अंतर्विषयी दृष्टिकोण पर आधारित है तथा मीडिया एवं संचार से संबंधित विभिन्न क्षेत्रों में अनुसंधान और ज्ञान-सृजन को प्रोत्साहित करता है। यह कार्यक्रम उन शोधार्थियों के लिए विशेष रूप से डिज़ाइन किया गया है जो मीडिया एवं संचार अध्ययन के निरंतर विकसित होते क्षेत्र में गहन शोध करना और सार्थक योगदान देना चाहते हैं। यह कार्यक्रम पत्रकारिता, जनसंचार, डिजिटल मीडिया, फिल्म अध्ययन, राजनीतिक संचार, विकास संचार, विज्ञापन तथा जनसंपर्क जैसे विविध क्षेत्रों में गहन अनुसंधान के अवसर प्रदान करता है। कार्यक्रम आलोचनात्मक चिंतन, नवाचार तथा शैक्षणिक उत्कृष्टता को प्रोत्साहित करते हुए मीडिया एवं संचार अध्ययन के क्षेत्र में ज्ञान और अनुसंधान क्षमताओं के विकास पर बल देता है। कार्यक्रम एक सुदृढ़ शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराता है,
जिसमें विशेषज्ञ मार्गदर्शन तथा व्यापक अनुसंधान संसाधनों का सहयोग प्राप्त होता है। इनमें पुस्तकालय, डिजिटल डेटाबेस तथा क्षेत्रीय अध्ययन (फील्डवर्क) के अवसर शामिल हैं। शोधार्थियों को विविध अनुसंधान विशेषज्ञता वाले अनुभवी संकाय सदस्यों का मार्गदर्शन प्राप्त होता है, जिससे वे ऐसा सार्थक शोध कर सकें जो अकादमिक विमर्श और मीडिया उद्योग दोनों के लिए उपयोगी हो। अपने सुव्यवस्थित पाठ्यक्रम एवं अनुसंधान प्रशिक्षण के माध्यम से यह कार्यक्रम स्वतंत्र अनुसंधान क्षमता, अनुसंधान पद्धतियों में दक्षता तथा राष्ट्रीय एवं वैश्विक मीडिया परिदृश्यों की व्यापक समझ विकसित करता है।
पाठ्यक्रम के उद्देश्य
- सामाजिक एवं औद्योगिक समस्याओं की पहचान, विश्लेषण तथा उनके साक्ष्य- आधारित समाधान विकसित करने हेतु शोधार्थियों में अनुसंधान अभिरुचि एवं क्षमता का विकास करना।
- सामान्य तथा विषय-विशिष्ट अनुसंधान दृष्टिकोणों एवं अनुसंधान पद्धतियों का आधारभूत ज्ञान प्रदान करना।.
- वैज्ञानिक सिद्धांतों एवं पद्धतियों के आधार पर गुणात्मक एवं मात्रात्मक अनुसंधान करने के लिए आवश्यक कौशल विकसित करना।s.
- तर्क, तार्किक व्याख्या तथा मूल्यांकन क्षमता सहित आलोचनात्मक, विश्लेषणात्मक एवं अन्वेषणात्मक चिंतन कौशल का विकास करना।.
- उत्तरदायी शोधकर्ता, लेखक, शिक्षाविद् एवं पेशेवर के रूप में विकसित होने हेतु नैतिक मूल्यों तथा व्यावसायिक निष्ठा को प्रोत्साहित करना।


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