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Sanchar Madhyam

संचार माध्यम

 

संपादक

प्रो आनंद प्रधान
E-Mail: apradhan28@gmail.com 
 

सहायक संपादक 

View Document0पवन कौंडल

 E-Mail: pawankoundal@gmail.com

 

संचार माध्यम (ISSN 2321-2608) भारतीय जन संचार संस्थान की मीडिया और उससे जुड़े मुददों पर हिंदी में प्रकाशित होने वाली एक अग्रणी पीयर रिव्यूड शोध पत्रिका है। इसका प्रकाशन 1980 में प्रारंभ हुआ था और आज यह हिंदी भाषा में संचार, मीडिया और पत्रकारिता से संबंधित विषयों पर विभिन् प्रकार के विचारों, टिप्पणियों और शोध पत्रों की अभिव्यक्ति और प्रकाशन का प्रमुख मंच है। संचार माध्यम में मीडिया से संबंधित सभी प्रकार के विषयों पर मुख्यत: अकादमिक शोध और विश्लेषण प्रकाशित होते हैं। इसमें हिंदी के अतिरिक् अन् भारतीय एवं विदेशी भाषाओं के शोध पत्रों को अनुवादित करके भी प्रकाशित किया जाता है।

 

प्रकाशन नैतिकता और साहित्यिक चोरी (Publication Ethics and Plagiarism)

  • संचार माध्यम के लिए शोध लेख भेजने वाले लेखकों को उन्हें अन्य पत्रिकाओं को नहीं भेजना चाहिए और ही शोध लेखों को अन्यत्र पूरी तरह से या समान रूप से उसी सामग्री के साथ किसी अन् पत्रिका में प्रकाशित किया जाना चाहिए।
  • किसी भी तरह की साहित्यिक चोरी किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं है। लेख के साथ मूल कार्य का घोषणापत्र प्रस्तुत किया जाना अनिवार्य है जिसके बिना लेखों पर कोई भी विचार नहीं किया जाएगा। लेखकों को लेखों की प्रामाणिकता सुनिश्चित करनी चाहिए। कोई भी अनैतिक व्यवहार (साहित्यिक चोरी, गलत डेटा आदि) किसी भी स्तर पर (पियर रिव्यू या संपादन स्तर) लेख की अस्वीकृति का कारण बन सकता है किसी भी समय साहित्यिक चोरी और/या परिणामों का खुद के निर्माण आदि पाए जाने पर प्रकाशित लेख वापस लिए जा सकते हैं।

 

शोध-पत्र जमा करने के दिशा-निर्देश – 

  • अपना शोध-पत्र एम.एस वर्ड में मंगल फॉण्ट में 12 पॉइंट साइज़ में टंकित कर View Document0sancharmadhyamiimc@gmail.com पर -मेल करें। 
  • शोध-पत्र लिखते समय संदर्भों का स्पष्ट उल्लेख करें। पुस्तक का संदर्भपत्र-पत्रिका का सन्दर्भप्रकाशन वर्ष एवं संस्करण का अंकित होना अनिवार्य है। सन्दर्भ के लिए .पी.  शैली (APA, छठा संस्करण) का उपयोग करें। यह अनिवार्य है।
  • शोध-पत्र पूर्ण रूप से मौलिक होना चाहिएजिसका घोषणा-पत्र साथ में संलग्न होना चाहिए अन्यथा शोध पत्र पर गौर नहीं किया जायेगा।
  • संचार माध्यम में प्राप् शोध आलेखों को दो विशेषज्ञों के पास बिना उसके लेखक/लेखकों का नाम बताए समीक्षा के लिए भेजा जाता है। उनकी टिप्पणी, सुझावों और अनुशंसा के आधार पर शोध-पत्रों के प्रकाशन का निर्णय लिया जाता है। संपादन-परिषद् के संतुष्ट होने पर ही शोध-पत्र प्रकाशित किया जायेगा।
  • शोध-पत्र के आरम्भ में शोध-सारांश (अधिकतम 200 शब्द) तथा अंत में, निष्कर्ष अवश्य लिखें।
  • समस्त शोध-पत्रों का सर्वाधिकारसंचार माध्यमके पास सुरक्षित है।
  • पत्रिका में प्रकाशित सभी शोध-पत्र के पुनर्प्रकाशन के लिए प्रधान-सम्पादक से अनुमति लेना आवश्यक होगा।
  • शोध-पत्रिका में प्रकाशित सभी पत्रों के विचार लेखकों के अपने हैं। इससे संपादन-मंडल का सहमत होना अनिवार्य नहीं है।
  • संक्षिप् सम-सामयिक मीडिया टिप्पणियों, साक्षात्कारों और पुस्तक समीक्षा का निर्णय संपादक-मंडल करता है।